महाविद्यालय में शिग्रु पर विशिष्ट व्याख्यान।
महाविद्यालय के संस्कृत विभाग द्वारा “शिग्रु (मोरिंगा) का वेद, आयुर्वेद एवं आधुनिक विज्ञान में महत्व” विषय पर एक विशेष अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्राचार्या डॉ. अलका मित्तल के मार्गदर्शन में तथा संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. सुमन की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ।मुख्य वक्ता सुप्रसिद्ध स्वास्थ्य-विशेषज्ञ प्रो. के. सी. वर्मा ने शिग्रु के औषधीय एवं पोषक गुणों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वैदिक साहित्य और आयुर्वेदिक ग्रंथों में शिग्रु का उल्लेख कटु रसयुक्त, ऊष्ण प्रकृति का तथा कफ-वात शमनकारी औषधि के रूप में मिलता है। आधुनिक विज्ञान ने भी इसे सुपरफूड का दर्जा दिया है, क्योंकि यह आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होकर रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।प्रो. वर्मा ने कहा कि आयुर्वेद भारतीय जीवन-दर्शन की अमूल्य धरोहर है और इसकी शिक्षाएँ आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने छात्राओं को प्रेरित किया कि वे आधुनिक चिकित्सा-विज्ञान के साथ-साथ आयुर्वेद की परंपरा को भी अपनाएँ। व्याख्यान के दौरान छात्राओं ने विभिन्न प्रश्न पूछकर सक्रिय सहभागिता प्रदर्शित की। मुख्य वक्ता द्वारा सभी प्रश्नों का समाधान प्रस्तुत किया गया तथा उनकी जिज्ञासाओं का समुचित शमन किया गया। इसी कड़ी में उन्होंने शिग्रु पौधों के महत्व को रेखांकित करते हुए परिसर में पौधारोपण किया, जिसमें छात्राओं ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया और लगाए गए पौधों के संरक्षण का संकल्प लिया।इस अवसर पर प्राचार्या डॉ. अलका मित्तल ने कहा कि ऐसे व्याख्यान और गतिविधियाँ छात्राओं को भारतीय संस्कृति की वैज्ञानिकता से परिचित कराने के साथ-साथ पर्यावरणीय चेतना भी जागृत करती हैं। कार्यक्रम के समापन पर संयोजिका डॉ. सुमन ने मुख्य वक्ता एवं प्राचार्या महोदया का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर श्रीमती अनीता वर्मा, डॉ निशा शर्मा, कुमारी मनीषा, डॉ महिमा इत्यादि अन्य शिक्षिकाएं भी उपस्थित रही
